जानिये कैसे, इंदिरा ने प्रधानमंत्री बनने के लालच मैं लिखवाया भारत का झूठा इतिहास
राजनीति में गद्दी का लोभ ना जाने कितने लोगों को ले डूबा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, भारत का सबसे पुराना राजनैतिक गांधी परिवार। भारतीय राजनीती के इतिहास की तरफ अगर नज़र दौड़ा के देखा जाए तो, गांधी परिवार के प्रधानमंत्रियों का उनके पद के प्रति लालच साफ़-साफ दिख जाएगा। इसी क्रम में इंदिरा गांधी ने तो अपने पद को बचाने के लिए देश के इतिहास से बहुत बड़ा खिलवाड़ कर दिया था।
आज तक हमारे देश के बच्चे अकबर को महान और महाराणा प्रताप को कायर समझते हैं। लेकिन सच्चाई कुछ और है, और उसे किताबों के पन्नों से मिटा दिया गया। ये सब किया कुछ वामपंथी विचारधारा के लोगों ने, और इससे भी बड़ी बात ये कि इंदिरा गांधी जानती थी और फिर भी उन्होंने ऐसा होने दिया।
आइये आपको बताते हैं इंदिरा की वो एक गलती, जिसका भुगतान हमारे स्कूली बच्चे आज तक कर रहे हैं।
बात है सन 1971 की है, इंदिरा को प्रधानमंत्री बनने के लिए वामपंथी लोगों का समर्थन चाहिए था। जिसके लिए इनके बीच समझौता हुआ कि "आप प्रधानमंत्री बन जाओ और हमारे लोगों को देश का शिक्षा बोर्ड दे दो" ।इंदिरा गांधी ने भी प्रधानमंत्री बनने के लालच में वामपंथी लोगों की बात मान ली और कट्टर वामपंथी विचारधारा वाले डा. नूरूल हसन को केन्द्रीय शिक्षा राज्यमंत्री का पद सौंप दिया गया।
सन 1972 में इन 'सेकुलरवादियों' ने भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद का गठन कर इतिहास पुनर्लेखन की घोषणा की। सुविख्यात इतिहासकार यदुनाथ सरकार, रमेश चंद्र मजूमदार तथा श्री जीएस सरदेसाई जैसे सुप्रतिष्ठित इतिहासकारों के लिखे ग्रंथों को नकार कर, सिरे से नए और झूठे इतिहास लेखन का कार्य शुरू किया गया ।
घोषणा की गई कि इतिहास और पाठ्यपुस्तकों से वे अंश हटा दिये जाएंगे जो राष्ट्रीय एकता में बाधा डालने वाले और मुसलमानों की भावना को ठेस पहुँचाने वाले लगते हैं। जिसके आधार पर डा. नूरूल हसन ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भाषण में कहा-
"महमूद गजनवी औरंगजेब आदि मुस्लिम शासकों द्वारा हिन्दुओं के नरसंहार एवं मंदिरों को तोड़ने के प्रसंग राष्ट्रीय एकता में बाधक है अत: उन्हें नही पढ़ाया जाना चाहिए"।
वामपंथियों ने भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महान स्वतंत्रता सेनानी सावरकर पर अंग्रेजों से क्षमा मांगकर अण्डमान के काला पानी जेल से रिहा होने जैसे निराधार आरोप लगाये और उन्हें वीर की जगह कायर बताने की बात लिखी है। (यह बातें डा. अमरीश प्रधान द्वारा एक संगोष्टी में बताई गयी है।)
आपको ये जान कर बहुर आश्चर्य होगा कि स्कूल पुस्तकें जांचने के लिए कोई बोर्ड नहीं है।
देश का इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि हमारे बच्चे नहीं पढ़ पा रहे हैं कि औरंगजेब ने किस तरह से देश में हिन्दुओं का कत्लेआम करवाया था और महाराणा प्रताप एक वीर योद्धा थे। वामपंथी लोगों ने स्कूल की किताबों में यह तो नहीं लिखा कि इन लोगों ने भारत देश को किस तरह से लुटा है। सबसे बड़ा मजाक यह है कि स्कूल की किताबों में कौन सा लेखक क्या लिख रहा है, इसकी जाँच करने के लिए कोई भी बोर्ड नहीं है।
आज भी कांग्रेस की दया पर चलने वाले कई वामपंथी लोग शिक्षा बोर्ड पर कब्जा किये बैठे हैं और कभी भी कुछ भी लिख देते हैं। कोई लिखता है कि राम नहीं थे तो कोई महाभारत को एक कहानी लिखता है, किन्तु एक खास धर्म से पंगा कोई नहीं लेता है।
अब वक़्त आ गया है कि इस झूठे इतिहास को जड़ से उखाड़ फ़ेंक दिया जाये, और सच्चाई को सामने लाया जाए। आप अगर चाहते हैं कि अब हमारे बच्चे देश का सच्चा इतिहास पढ़े, तो आपको आज ही अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
और साथ ही साथ इंदिरा गांधी के इस काम को जनता के सामने लाये जाने की आवश्यकता है, इसलिए इस लेख को अधिक से अधिक लोगों तक जरूर पहुचायें.
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deepak raj mirdha
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Reviewed by deepakrajsimple
on
October 21, 2017
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